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अपने गांव में जीरो से हीरो बनिए।

अपने गांव के सबसे फायदेमंद किसान बनिए।

फायदे की खेती का मंत्रमल्टीप्लायर तंत्र !

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क्या आप खेती से होनेवाला फायदा 3 गुना तक बढ़ाना चाहते है ?अगर हां,तो ये जानकारी आप के लिए है।

क्या आपके खेत में निम्न में से कोई समस्या है ?

  • कीड़ और रोगों का बढ़ना
  • उत्पादन घटना
  • मिट्टी सख्त होना, बंजर बनना
  • उत्पादन खर्च बढ़ना
  • फसल के लिए कम पानी उपलब्ध होना
  • किसी कारण से फसल न बढ़ना
  • तूफान, बाढ़, बेमौसम बारिश, ओले गिरना,... आदि से हानी बढ़ना

क्या आप इन समस्याओं से मुक्ति चाहते है?
तो फिर हम आप की मदत कर सकते है ।

क्या है ये मल्टीप्लायर तकनीक ....
१३ साल के अथक और गहरे संशोधन से इस तकनीक का निर्माण हुआ है।
इसके इस्तेमाल से निम्नलिखित परिणाम मिलते है।

  • पहले ही सीजन में, उत्पादन में ३० से
    ५० % की बढ़त

  • उत्पादन खर्च में ८० % तक कटौती
  • उत्पादन ३ गुना तक बढ़ जाता है
  • कीड रोग की समस्या घट जाती है
  • मात्र ७ सालों में संपूर्ण आत्मनिर्भरता अर्थात खाद - दवाइयाँ से पूर्णत: मुक्ति
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अधिक जानकारी के लिए आप हमे नीचे दिये गए नंबर पे कॉल या मेसेज कर सकते है।

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एक्सपर्ट से फ्री सलाह के लिए ...

आप अधिक जानकारी लेना चाहते है तो नीचे   देखिए...

  • कैसे मिलेगी ११ समस्याओं से मुक्ती? ( ५ वीडियो )
  • मल्टीप्लायर के निर्माण की कहानी
  • किसानों के अनुभव के बोल
  • अन्य खाद के साथ तुलनात्मक रिपोर्ट
  • असंभव लगनेवाले रिजल्ट्स
  • सबसे बड़ा कार्य प्राकृतिक व्यवस्था का पुनर्निमाण
  • विविध बोनस
  • राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र
  • देश, विदेश से बढ़नेवाली मांग

    4 लाख रूपयों का केंचुआ खाद मुफ्त

    मल्टीप्लायर तकनीक से खेत में केंचुओं की संख्या बहुत बढ़ जाती है।अगर खेत में 100 दिन भी पानी उपलब्ध रहेगा तो प्रति एकड़ 4 लाख रुपयों का केंचुआ खाद हर साल आप के खेत में फ्री बनने लगता है। अगर खेत में 300 दिन से अधिक पानी रहता है तब यह खाद और भी बढ़कर मिलेगा।

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    तुलना :- अन्य सेंद्रिय/ ऑर्गैनिक पध्दती और मल्टीप्लायर तकनीक

    समय- अन्य ऑर्गैनिक पद्धती में पहले 2 से 3 साल उत्पादन घटता है और फिर धीरे धीरे बढ़ता है। इतना इंतजार ज्यादातर किसान नहीं कर सकते।

    कष्ट- अन्य ऑर्गैनिक पद्धती में शारीरिक कष्ट बहुत ज्यादा करना पड़ता होता है। नई पिढी इतना कष्ट करने के लिए उत्सुक नही। मल्टीप्लायर तकनीक में कष्ट कम से कम होता है।

    खर्च -  अन्य ऑर्गैनिक पद्धती में गोबर से लेकर अन्य कई बाहरी चीजें भी आवश्यक होती है। खर्च बढ़ जाता है।मल्टीप्लायर तकनीक से खर्च 80% घटकर 7 साल बाद शून्य हो जाता है।

    उपलब्धता - देसी गाय कई जगह पर उपलब्ध ना   होने के कारण देसी गाय का गोबर आसानी से नहीं मिलता।

    30/35 साल से ऑर्गैनिक   खेती का प्रचार हो रहा है, मगर भारत के 1% किसान भी सेंद्रीय खेती नहीं कर रहे है। सिर्फ 7 साल में भारत के 27 राज्यों के लगभग 500 से अधिक जिलों के लाखों किसान आज मल्टीप्लायर तकनीक 91 से अधिक फसलों के लिए इस्तमाल कर रहे है।

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    मल्टीप्लायर के निर्माण की कहानी

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    मल्टीप्लायर के निर्माण की कहानी

    एक 👨‍🌾किसान का कृषि क्षेत्र में अनोखा योगदान ! एक किसान ने अपने 🌾खेत में किये सैंकड़ो प्रयोग !! शुरू करनी पड़ी खुदकी फैक्टरी !!! सन 2001 से 2014 तक 13 साल का अविश्रांत परिश्रम, 370 लोगो का साथ और एक अद्भूत खोज !!!

    महाराष्ट्र के धुलिया स्थित श्री चौरसिया ने अनेक संकटों से घिरे खेती की
     समस्याओं के मूल कारण तक जानेे की ठान ली और अपने खेत में प्रयोग शुरु किये।
    खेती हजारो साल से चल रही हैं। मगर पिछले 50 साल में ही क्यों समस्याऐं शुरू हुई ? देश में लाखो हेक्टर जमीन का बंजर होना - किसानों की
    आत्महत्याऐं
    - किसानों का हतोत्साहित होकर खेत बेच के शहर में बेसहरा मजदूर बनना -भोजन जहरीला बनने से बढती बिमारियाँ...आदि अनेक कारणों ने उनका संकल्प दृढ होता गया और शुरू हुई एक शृंखला - अनेक प्रयोगों की !
    "जो निसर्ग जंगलोंमें 100% काम करता है वो अपने 🌾खेत मै सिर्फ 10% काम करता है।
    अगर प्रकृति/निसर्ग को पुरी ताकद से आपके खेत में काम करने दिया जाय तो खेती के बहुत सारे प्रॉब्लेम खत्म❌ हो जायेंगे, निर्माण ही नहीं होंगे।"
    मतलब -
    पिछले 50 सालों में हम प्रकृति के काम में बाधा डाल रहे है। खेत में कार्यरत प्राकृतिक जैविक यंत्रणा को, हम ने जाने अनजाने बड़ी आहत पहुँचाई। खेती में असंतुलन पैदा कर दिया। मानवनिर्मित यह बाधा हटा दे तो अत्यंत 😱आश्चर्य जनक परिणाम मिलेंगे। जैसे पहले ही साल 50% उत्पादन मैं 📈 बढ़ोतरी ! नॅचरल इकोसिस्टम पुनर्प्रस्थापित हो जाये तो,

    • उत्पाद में 3 गुना तक बढ़ौतरी !
    • रासायनिक खाद की जरुरत ख़त्म!!
    • फसल अन्दर से इतनी ताकदवर की हर किड ,रोग का यशस्वी मुकाबला करे - याने जहरीली दवाइयाँ बंद!!!
    • जमीन का ph बैलेन्स एकदम ठीक,
    • पूरा खेत हजारो केचुओं से हरदम के लिये भर जाना ; याने साल में 4 से 10 लाख रुपये का केंचुआ खाद फ्री उपलब्ध।
    • आवश्यक बॅक्टेरिया काउंट प्रतिग्राम 10 करोड़ से जादा बढना।
    • जमीन में ऑक्सिजन का बढना और फसल के दुष्मन विषाणूओं का  जमीन से कम होते जाना।
    • हार्ड बनी जमीन का इतनी मुलायम उपजाऊ होते जाना की अब उसे किसी बाहरी सहारे की जरुरत न हो।

    एक तीर में 8 - 10 निशान। कुल मिलाकर लागत मूल्य 80℅ से घटाना और उत्पाद 3 गुना तक बढ़ाना!

    मल्टीप्लायर के इन अद्धभुत परिणामों के बारे में पूछते है तो, संशोधक किसान चौरसिया जी कहते है की, ये सब प्रकृति का कमाल है। हमें प्रकृति  को, नेचर-निसर्ग को हमारे खेत मै 100% काम करने देना चाहिए, उसके काम में बाधा डालना बंद कर देना चाहिए।**उत्पाद 3 गुना और मिट्टी मुलायम उपजाऊ होने के बाद मल्टीप्लायर के इस्तेमाल की आवश्यकता नहीं है - ऐसा चौरासियाजी ने बताया।
    एक सच्चा किसान ही ऐसी बात कर सकता है।

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    कन्हैया पटेल सर जी के कारण अनेक किसानों का जीवन समृद्ध हो रहा है। १ करोड एकड को ऑर्गनिक बनाने के,और 3 गुना फायदे में लाने के मिशन में उनका बड़ा योगदान है।

    अनुभव के बोल

    निम्नलिखित 7 प्रकार के लाखों अनुभव
    देशभर लिए गए है।

    1) केंचुएँ वापिस आ गए

    केंचुओं का घर याने मिट्टी का ऊपरी स्तर सुधर जाने से केंचुएँ वापिस आकर अपना कार्य शुरू कर देते है। यह अनुभव आज देशभर के किसान ले रहे है।

    2) उत्पादन 50 % बढ़कर मिला

    श्री रवींद्र शिंदे जी  ( ग्राम कोपार्डे तहसील खंडाला , सातारा महाराष्ट्र ) का उत्पादन 50% बढ़कर मिला I

    मल्टिप्लायर तकनीक से ज़मीन की प्राकृतिक व्यवस्था पहले दिन से सुधरने लगती है। फसल को भरपूर भोजन मिल ज़ाने से पहले सीजन में ही ३०% से ५०% उत्पादन बढ़कर मिलता है।

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    3) उत्पादन 2/3 गुना बढ़कर मिला

    किसान भाई श्री राजू नामदेव डगले ( ग्राम अकोले, जिला अहमदनगर, महाराष्ट्र )
    दो साल से किसान भाई मल्टिप्लायर का इस्तमाल कर रहे है। पहले साल 10 क्विंटल से बढ़कर 23 क्विंटल और दुसरे साल 30 क्विंटल उत्पादन आया!

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    4) मल्टीप्लायर के इस्तमाल से खर्चा कम हुआ

    श्री बबन भोयर ( नाम श्री बबन भोयर ग्राम श्रीखंडा तहसील मौदा जिला नागपुर महाराष्ट्र ) जी का उत्पादन खर्च 75% कम हुआ I

    किसानों का खाद और दवां पर होने वाला खर्च ज्यादा है और वो हर साल बढ़ता जा रहा है।मल्टीप्लायर तकनीक से यह खर्चा हर साल कम होते होते 80% घट जाता है।

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    5) मल्टीप्लायर के इस्तमाल से किडरोग की समस्या से मुक्ति मिली

    श्री गोरक्षनाथ सातपुते ( ग्राम वडगाव गुप्ता जिला अहमदनगर महाराष्ट्र ) जी को खेती मै किडरोग की समस्या से मुक्ति मिली I

    मल्टिप्लायर तकनीक के इस्तमाल से ज़मीन की प्राकृतिक व्यवस्था सदृढ होती है तो मिट्टी ज्यादा उपजाऊ होकर फसलों को भरपूर भोजन उपलब्ध हो जाता है।इसकी वजह फसल बलवान होने से धीरे धीरे किड रोग कम होते जाते है या बंद हो जाते है।

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    6) कम पानी / बिना पानी के भी बढ़िया उत्पादन

    किसान भाई पंडितराव पाटिल ( गांव पाष्टे,तहसील सिंदखेड़ा,जिला धुलिया )

    किसान पिछले तीन साल से मल्टीप्लायर इस्तमाल कर रहे थे इसलिए रब्बी का मौसम मे एक भी बार पानी न देते 15 क्विंटल गेंहू मिला।

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    7) आपदाओ मे कम नुकसान हुआ

    किसान भाई श्री सहसराम वनवे ( ग्राम डिवारवाड़ा,तहसील मोहाड़ी,जिला भंडारा, महाराष्ट्र )

    बारिश में 3 दिन 15 फिट पानी में डूबने के बावजुद पानी निकलने पर फसल अच्छी आई ।

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    किसानों का सीधा अनुभव: विभिन्न फसलों पर रिजल्ट देखने के लिए + पर क्लिक करें

    धान : विभिन्न रिझल्ट्स

    धान : विभिन्न रिजल्ट देखने के लिए नीचे दिए वाक्य पर क्लिक करें।

    1) धान की फसल 15 फुट पानी में 03 दिन तक डूबी हुई थी बावजूद चमत्कारी अनुभव हुआ

    2) धान के पौधों में ३० से ४० तक फुटवे (कल्ले), उत्पादन प्रति एकड़ १० क्विंटल के लगभग ज्यादा मिलेगा !

    3) पिछले मिनिमम उत्पादन के मुकाबले मल्टीप्लायर तकनीक का उत्पादन तीन गुना हो गया है तथा पिछले मैक्सिमम उत्पादन से डबल हो गया है

    4) जिस खेत से उत्पादन में बड़ी घट की संभावना थी, अब उस खेत से बढ़ा हुआ उत्पादन मिलेगा !

    5) मल्टीप्लायर तकनीक वाली इस धान की फसल को, मिल सकता है रेकार्ड ब्रेक उत्पादन का पहला पुरस्कार;  उत्पादन प्रति एकड़ 40 क्विंटल से ज्यादा मिलने की संभावना है

    6) खर्च रासायनिक से आधा,  उत्पादन २५ प्रतिसत ज्यादा

    मक्का : विभिन्न रिझल्ट्स

    अरहर : विभिन्न रिझल्ट्स

    अरहर : विभिन्न रिजल्ट देखने के लिए नीचे दिए गए वाक्य पर क्लिक करें।

    1) मसूर दाल में उत्पादन ३ गुना बढ़ गया

    2) शेडयूल तूर (अरहर) मसूर-उड़द-मूंगशेडयूल तूर (अरहर) मसूर-उड़द-मूंग

    सोयाबीन : विभिन्न रिझल्ट्स

    सोयाबीन: विभिन्न रिजल्ट देखने के लिए नीचे दिए गए वाक्य पर क्लिक करें।

    1) कोल्हापुर जिले में एकरी १० क्विंटल से ज्यादा उत्पादन नहीं मिलता, इस खेत से डेढ़ एकर क्षेत्र में 23 क्विंटल उत्पादन मिला है।कोल्हापुर जिले में एकरी १० क्विंटल से ज्यादा उत्पादन नहीं मिलता, इस खेत से डेढ़ एकर क्षेत्र में 23 क्विंटल उत्पादन मिला है।

    2) एक पौधे पर फली की संख्या २०० तक हैं ।एक पौधे पर फली की संख्या २०० तक हैं ।

     3) १०० प्रतिसत ऑर्गेनिक सोयाबीन !१०० प्रतिसत ऑर्गेनिक सोयाबीन !

    4) सोयाबीन का उत्पादन डबल हो गया, 6 क्विंटल से 12 क्विंटल उत्पादन बढ़ गया।सोयाबीन का उत्पादन डबल हो गया, 6 क्विंटल से 12 क्विंटल उत्पादन बढ़ गया।

    प्याज : विभिन्न रिझल्ट्स

    ज्वार : विभिन्न रिझल्ट्स

    पत्तागोभी: विभिन्न रिझल्ट्स

    28 राज्यों में 111 से अधिक फसलों पर लिए हुए ऐसे हजारों रिजल्ट्स हमारे रेकॉर्ड में दर्ज है ।

    आप को मल्टीप्लायर तकनीक के साथ और क्या मिलेगा?

    इस तकनीक का विस्तारपूर्वक ट्रेनिंग

    सारी फसलों के लिए अनुभवी कंसल्टेंट (consultant) की सलाह मुफ्त मिलेगी। कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं।

    अपने गांव या तहसील में डीलर शीप का मौका!

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    कैसे इतने अभूतपूर्व रिजल्ट्स निर्माण करता है मल्टीप्लायर तकनीक?

    यह तकनीक आप के खेत की प्राकृतिक व्यवस्था (NATURAL ECOSYSTEM) को दुरुस्त (REPAIR) करता है।
    परिणामस्वरूप,

    • मिट्टी में केंचुएँ वापिस आकर उन की संख्या तेजी से बढ़ती है,
    • जीवाणुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है,
    • मिट्टी में सेंद्रीय कर्ब (organic carbon) का प्रमाण बढ़ता है और
    • मिट्टी का सामू संतुलित (pH balance) होता है।

    प्राकृतिक व्यवस्था (NATURAL ECOSYSTEM) का पुनर्निर्माण ये मल्टीप्लायर की सबसे बड़ी देन है।विशेष बात ये है की यह कामकम कष्ट , कम खर्च और कम समय में पूरा होता है ।

    क्या क्या फायदे दिलाएगा मल्टीप्लायर तकनीक

    खेती में मल्टीप्लायर तकनीक का इस्तेमाल होने के बाद फसल में दिखनेवाले बदलाव.

    1) अगर फसल की ग्रोथ रुकी हो तो ग्रोथ सुरु हो जाती है।
    2) फसल में फ्लावरिंग स्टेज हो, तब ज्यादा फ्लावरिंग मिलती है।
    3) फसल में फ्लावरिंग गिर जाने की समस्या से निजात मिलती है।
    4) फ्लावरिंग पर आनेवाले किटक तथा रोग के अटैक कम से कम हो जाते है।
    5) फ्लावरिंग सेटिंग का प्रमाण बढ़ जाता है, सेटिंग हो चुके फल गिरने के प्रमाण में तुरंत कमी आती है।
    6) फसल के पत्ते हरे-हरे होना सुरु हो जाते है, अगर पत्ते हरे हों तो डार्क ग्रीन बन जाते है।
    7) जिन पत्तों की ग्रोथ सुरु है, उनका आकार बड़ा बन जाता है, नए आनेवाले पत्ते बड़े आकार के आते है।
    8) फसल का चहुमुखी विकास होता है, ज्यादातर फसलों में शाखाओं पर उत्पादन मिलता है, इसलिए शाखाओं की संख्या बढती है।
    9) मल्टीप्लायर के इस्तेमाल के बाद फसल ताकतवर बन जाती है, इसलिए उस फसल पर किटक तथा रोगों का अटैक कम से कम हो जाता है।
    10) रासायनिक खेती में फसल पर किटक और रोगों के लिए अनेक छिड़काव के बाद भी रिझल्ट नहीं मिलता, जबकि, मल्टीप्लायर के इस्तेमाल के बाद जहरीली दवाओं के छिड़काव कम से कम हो जाते हैं।
    11) मल्टीप्लायर का इस्तेमाल होनेवाली फसलों पर मादी फूल ज्यादा आते है।
    12) कुछ फसलों को भोजन कम मिलने के कारण उनके पत्ते लाल होनेलगते है, या पत्तों का किनारा लाल होने लगता है, जैसे कांदे की फसल में पत्तियों का अग्रभाग लाल हो जाता है, जैसे गर्मी के मौसम में भिन्डी की फसल के पत्ते पीले-पीले दिखने लगते है, जिसे यलो मोझक कहा जाता है,मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से इन सभी समस्याओं पर निजात पाया जा सकता है।
    13) मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से उत्पादन का आकार बढ़ता है, फलों का आकार बढ़ता है।14) मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से उत्पादन की घनता बढ़ती है इसलिए वजन बढ़कर मिलता है, जिस कैरेट में आप २० किलो माल भरते थे,उसका वजन २५ से २८ किलो आता है।
    15) उत्पादन का स्वाद अप्रतिम बनता है, उत्पादन को आकर्षक कलर आता है,  किसी भी फसल में जहाँ मल्टीप्लायर का इस्तेमाल हुआ है, वहां किटक तथा रोग कम से कम आते है।
    16) कपास लाल पड जाने से उत्पादन प्रभावित होता है, जिस खेत में मल्टीप्लायर का इस्तेमाल होता है उस खेत की फसल लाल नहीं पड़ती, अगर पड़ती है तब भी एक छिड़काव में हरी होने लगती है।
    17) मल्टीप्लायर इस्तेमाल करने से फसल का प्रकृति से सम्बन्ध जुड़ जाता है, इसलिए प्रकृति की विनाशकारी शक्तियां फसल को प्रभावित करने में अक्षम सिद्ध होती हैं, जैसे पानी की कमी में भी फसल का जिन्दा रहना।
    18) मल्टीप्लायर मिटटी में २ से ३ मीटर नीचे जा चुके केंचुओं (मराठी में गांडूळ गुजराती में अड़सिया) को ऊपर बुलाकर मिटटी को उपजाऊ बनाने के काम में लगाता है, 5 से 7 साल में केंचुओं की निश्चित संख्या कार्यरत हो जाने के बाद प्रति वर्ष 120 टन केंचुआ खाद बिनामूल्य मिलता है, जब केंचुआ खाद आवश्यक मात्रा में मिलने लगता है, आपकी खेती में बाहर से एक रुपये का खाद नहीं डालना पड़ता।

    इसीके साथ हमारे एक एक्सपर्ट आपको उत्पादन बढ़ाने में व्यक्तिगत मार्गदर्शन करेंगे ।

    इतना ही नहीं बल्की ...

    • इस्तमाल के साथ साथ डीलर बनने का मौका ।
    • 13 साल के संशोधन पर आधारित किताब पूर्णत: मुफ्त
    • मल्टीप्लायर तकनीक का विस्तृत प्रशिक्षण मुफ्त
    • प्रगतीशील किसानों के समूह का हिस्सा बनने  का सुनहरा मौका
    • फायदे की खेती के लिए आवश्यक एक्सपर्ट की सलाह मुफ्त

    भीष्मप्रतिज्ञा किजिए,

    अब सिर्फ फायदे की खेती ही करेंगे!

    हमारी सस्ती, आसान और गतिमान रिजल्ट देनेवाली अनोखी ऑर्गैनिक तकनीक की सहायता से, अब नुकसानवाली खेती भूलकर, फायदे की खेती का मंत्र और तंत्र अपनाइए।

    समस्याओं से
     सदा के लिए मुक्ती!

    समस्या 1)*

    क्या किड रोग की समस्या पर आप पर्मनंट इलाज चाहते है |

    समस्या 2)*

    • क्या आपका खेती का उत्पादन घटता जा रहा है?
    • क्या आपके फसल की ग्रोथ रुक गई है?
    • क्या आपकी खेती बंजरता की ओर जा रही है?
    • क्या आपका उत्पादन खर्चा हर साल बढ़ रहा है?

    समस्या 3)*

    • क्या आपकी फसल को कम पानी मिलता हैं?
    • बिल्कुल पानी न मिलना, कम पानी मिलना या अनियमित पानी मिलने की समस्या है ?
    • क्या आपकी फसल का प्राकृतिक आपदा में ज्यादा नुकसान होता है ?

    समस्या 4)*

    आप रासायनिक खेती से थक चुके हैं, आप 100% जैविक खेती करना चाहते हैं, लेकिन आपको कम लागत, कम मेहनत, 100% परिणाम का सही तरीका नहीं मिल रहा है ?

    * ऐसे सैंकड़ों हजारों रिजल्ट्स हमारे रेकॉर्ड में दर्ज है ।

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    गुलामी के चक्रव्यूह से सदा के लिए मुक्ती!

    यह तकनीक आप को स्वयंपूर्ण, आत्मनिर्भर  बनाता है। खाद-दवां के चक्रव्यूह से आप को सदा के लिए मुक्त करता है।
    प्राकृतिक व्यवस्था आप के खेत में स्थापित करने के कारण सात साल बाद आप को मल्टीप्लायर तकनीक की भी आवश्यकता नहीं रहती।

    मतलब 3 गुना उत्पादन बढ़ाने के बाद यह कंपनी आप को खुद के प्रोडक्ट की भी जरूरत नहीं ऐसा बताती है। ऐसे कहेने वाली शायद यह दुनिया की ऐसी एकमात्र कंपनी होगी।

    असंभव लगनेवाले अन्य फायदे भी मिले

    पथरीली जमीन में भी यशस्वी उत्पादन

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    बंजर जमीन में भी यशस्वी उत्पादन

    बंजर जमीन में ट्रक लोड रसायनिक खाद डालकर भी कुछ नहीं उगेगा मगर मल्टीप्लायर तकनीक इस्तेमाल किया तो तुरंत उत्पादन मिलना शुरू हो जाता है।

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    बिज प्रक्रिया : कमाल अंकुरण

    मल्टीप्लायर से बीज प्रकिया करने पर लगभर सारे बीज अंकुरित हो जाते है।

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    बीज स्वरूप बेचकर ज्यादा मुनाफा

    उत्पादन दमदार होने के कारण, मल्टीप्लायर तकनीक इस्तेमाल करने वाले किसान उत्पादन को बीज स्वरूप बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाते है।

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    बाजार से बीज खरीदने नहीं पड़ते

    मल्टीप्लायर तकनीक इस्तेमाल करने वाले किसानों को फसल सदृढ़ होने से मार्केट से नया बीज खरीदकर नही लाना पड़ता और उन की बचत हो जाती है।

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    रिजल्ट 8 दिन में दिखता है

    मल्टीप्लायर तकनीक की ताकत और उस के रिजल्ट्स देखने के बहुत इंतजार नहीं करना पड़ता। बस स्प्रे लेने के आठ दिन बाद इस की ताकत का अंदाजा आ जाता है। 6 महीने से अधिक उम्र की फसलों में 5 दिन के अंतर से दो स्प्रे लेने के बाद सिर्फ आठ दिन में रिजल्ट दिखने लगते है और इस पर भरोसा बढ़ जाता है।

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    आपदाओ मे कम नुकसान हुआ

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    सब कुछ बदल गया मगर एक चीज नहीं बदली

    आज 27 राज्यों के लाखो किसान इस तकनीक को अपना चुके है। इन 27 राज्यों में हर चीज बदलती रही...

    • मिट्टी अलग है,
    • हवामान अलग है,
    • पानी अलग है,
    • 91 से अधिक फसल और
    • हर फसल की अलग अलग वेरायटी..... मगर सभी जगह एक चीज कायम रही, वो है मल्टीप्लायर के अनोखे रिजल्ट्स!
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    बाहरी देशों से भी मांग हो रही है

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    देश विदेश की बड़ी lab से प्रमाणित 100% सेन्द्रिय

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    हर फसल में तीनों बातों में वृद्धि पाई गई है।

    Quantity
    उत्पादन 3 गुना या उस से ज्यादा भी बढ़कर मिला है।

    Quality
    हर फसल के उत्पाद की गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार मिला है।उत्पाद का रंग, रूप लुभावना, आकार बड़ा, स्वाद बेहद रुचिर और वजन भी बढ़ गया। हर फसल की आंतरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है।उदा. हल्दी में करक्यूमिन का प्रमाण बढ़ गया।
    3.14 के बजाय 5.43 हो गया।

    Market Rate
    क्वालिटी बेहतर होने के कारण ज्यादा दाम मिलता है। कई दफा ग्राहक खेत पर आकर माल ले जाते है।

    एक निर्णय आप की जिंदगी बदल सकता है।

    आज तक आप ने लाखो रुपयें खर्च किए है रसायनिक खाद और दवाइयों पर! इन के अतिरिक्त इस्तेमाल से हमारी जमीन की उपजाऊ क्षमता कम होते हुए, किड रोग बढ़ गए और खेती नुकसान में चली गई।
    अब खेती का लागत मूल्य 80% घटाकर उत्पादन तीन गुना बढ़ाकर, बाहरी खाद–दवां के चक्रव्यूह से मुक्त होने का मौका आया है।

    ज्यादा सोचते रह जाएंगे तो निर्णय नही कर पाएंगे। सिर्फ छोटी जगह पर डेमो लेने से इस की ताकत समझ आएगी। 
    डेमो का निर्णय लीजिए और अपने गांव के सबसे ज्यादा फायदे की खेती करने वाले किसान बनिए।

    मल्टीप्लायर कैसे पहूँचेगा ?

    हम इसे कुरियर या पोस्ट से भेजेंगे। इसका ट्रैकिंग लिंक भी हम आपको भेजेंगे जिससे आप मटेरियल कहा तक पहुँचा है,यह ट्रैक कर सकते है। फिरभी कुछ दिक्कत आती है, तो आप हमसे संपर्क कर सकते है।

    बाद में मल्टीप्लायर कहां मिलेगा ?

    बाद में मल्टीप्लायर कहां मिलेगा ?डेमो के लिए प्रोडक्ट भेजते वक्त, हम आपको निम्नलिखित जानकारी आपके व्हाट्सएप नंबर पर भेजेंगे।1.मल्टीप्लायर तकनीक की जानकारी
    2. फसल का शेड्यूल
    3. इस्तमाल करने की जानकारी
    4. मल्टीप्लायर तकनीक के ऑनलाइन ट्रेनिंग की लिंक इसके बाद आपको सीधे कंपनी से होलसेल रेट में प्रोडक्ट मिलने की व्यवस्था हम कर देंगे।
    फिर भी समस्या या अड़चन आने पर हम आपकी मदद करेंगे।

    यह खेत में कैसे इस्तमाल करना है ?

    आप इसे पाव एकड़ में इस्तमाल करे। 100 ग्राम आप 8 दिन की अंतराल से 2 बार जमीन को दीजिए और स्प्रे के लिए 1 लीटर को 1 ग्राम मल्टीप्लायर इस प्रमाण से स्प्रे कीजिए। इस प्रकार से 200 ग्राम जमीन को और 50 ग्राम स्प्रे के लिए इस्तमाल हो जाएगा। 8 से 15 दिन में आपको फसल में बोहोत अच्छा परिवर्तन दिखेगा।
    प्रत्यक्ष इस्तेमाल के वक्त आप दिए गए नंबर पर संपर्क करिए आपको विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

    Google Pay - 7000253292

    अधिक जानकारी के लिए आप हमे नीचे दिये गए नंबर पे कॉल या मेसेज कर सकते है।

    7000253292

    एक्सपर्ट से फ्री सलाह के लिए ...

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    कन्हैया पटेल सर जी के कारण अनेक किसानों का जीवन समृद्ध हो रहा है। १ करोड एकड को ऑर्गनिक बनाने के,और 3 गुना फायदे में लाने के मिशन में उनका बड़ा योगदान है।

    अगली पीढ़ी को उपजाऊ जमीन सौंपना हमारी जिम्मेदारी है।

    हमारे 13 साल के संशोधन से निर्मित फॉर्म्युले की मदद से,
    कम कष्ट, कम खर्च और कम समय
    में,
    अपने गांव में,
    सबसे ज्यादा फायदे की खेती करने वाले किसान
    बनिए,
    वो भी
    महंगी खाद - दवां के बगैर!